हितानंद के फैसले से हिल गए दावेदार – देवदत्त दुबे

हितानंद के फैसले से हिल गए दावेदार – देवदत्त दुबे
भाजपा में चौंकाने वाले फैसलों की श्रृंखला में प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद नंद शर्मा का अचानक से दायित्व परिवर्तन होने से भाजपा के वे दावेदार हिल गए है, जो हितानंद शर्मा के भरोसे ही थे।

दरअसल भाजपा में संगठन महामंत्री का पद महत्वपूर्ण माना जाता है, जो की सत्ता और संगठन के बीच सेतु का काम करता है, चाहे कोई भी फैसला हो, संगठन महामंत्री की सिफारिश महत्वपूर्ण मानी जाती है, कृष्ण मुरारी मोघे, कप्तान सिंह सोलंकी, अरविंद मेनन, सुहाष भगत और हितानंद शर्मा, ऐसे संगठन महामंत्री रहे हैं, जिनके कार्यकाल में भाजपा शून्य से शिखर पर पहुंची, पंचायत से पार्लियामेंट तक चुनाव जीत रही है।

इस दौरान इन संगठन मंत्रियों की सिफारिश पर न जाने कितने विधायक, सांसद, मंत्री बने होंगे, नगरी निकाय और त्रिस्तरीय पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों की तो कोई गिनती नहीं होगी, जो इन संगठन मंत्रियों के इशारे पर बने होंगे, यही नहीं विभिन्न निगम मंडलों में चाहे नियुक्तियों का मामला हो, चाहे कोई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाना हो, संगठन महामंत्री बेहद महत्वपूर्ण कड़ी होता है और संगठन मंत्रियों ने भी अपने-अपने कार्यकाल में भाजपा को मजबूत करने और कांग्रेस को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

बहरहाल प्रदेश भाजपा में महत्वपूर्ण फैसलों का इंतजार चल रहा है, चाहे विभिन्न निगम मंडलों में नियुक्तियों का मामला हो, चाहे मंत्रिमंडल विस्तार की बात हो और फिर चाहे नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में स्थान पाने का मामला हो, सभी पर पार्टी स्तर पर प्रक्रिया चल रही है, सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि निगम मंडलों में होने वाली नियुक्तियों की सूची तैयार है, जो कभी भी जारी हो सकती है, इसी तरह मंत्रिमंडल विस्तार का भी मामला है, जो कभी भी हो सकता है और भाजपा में जिस तरह से कई बार चौंकाने वाले फैसले आते हैं, उसमें पक्के तौर पर कोई कुछ नहीं कह सकता, जैसा की अचानक से हितानंद शर्मा को संगठन महामंत्री के दायित्व से मुक्त करके संघ के सह बौद्धिक प्रमुख बनाए गए, ऐसे ही चौंकाने वाले फैसले निगम-मंडलों की नियुक्तियों में मंत्रिमंडल विस्तार और राष्ट्रीय पदाधिकारी बनने वालों के बारे में भी लिया जा सकता है, इन सब पदों पर वे सब दावेदार जरूर अंदर से हिल गए होंगे, जिनको भरोसा था कि हितानंद शर्मा इन निर्णयों के समय उनकी सिफारिश करेंगे, अब जो भी नए संगठन महामंत्री बनेंगे, उनके सामने इन दावेदारों को अपना परफॉर्मेंस बताना पड़ेगा हालांकि भाजपा में व्यक्ति नहीं, सिस्टम काम करता है और लगभग सभी नेताओं के प्लस माइनस पार्टी के पास रहते हैं।


कुल मिलाकर चाहे राष्ट्रीय स्तर पर कोई फैसला हो, प्रदेश स्तर पर कोई फैसला हो या फिर स्थानीय स्तर पर अधिकांश फैसलों में पिछले कुछ वर्षों से भाजपा चौंकाने वाले फैसला ले रही है, सुहास भगत की जगह जब हितानंद शर्मा को संगठन महामंत्री बनाया गया था, तब भी पार्टी ने चौकाया था और अब हितानंद शर्मा का दायित्व बदलकर भी पार्टी ने चौकाया, आगे और पार्टी कितने चौकाने वाले फैसले लेगी, इसको लेकर पार्टी नेताओं में ही नहीं बल्कि राजनीतिक समीक्षकों में भी सस्पेंस बरकरार है।

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