राजनीतिक दल की मजबूती का आधार संगठन होता है, लेकिन इसके गठन में कितनी अड़चनें होती है, यह संगठन का प्रमुख ही समझ सकता है, भाजपा में भी पद खाली है तो कांग्रेस में पदों की संख्या घटाई जानी है।
दरअसल जैसे तैसे पार्टियां, संगठन प्रमुख की नियुक्ति कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद प्रदेश पदाधिकारी, कार्यकारिणी और जिलों में संगठन की जमावट करना, सबसे बड़ी चुनौती होती है। एक अनार, सौ बीमार की स्थिति होती है और जब पार्टी सरकार में हो, तब सबको पद चाहिए और जब पार्टी विपक्ष में हो, तब महत्वपूर्ण पद पर ही रुचि रह जाती है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के 3 महीने बाद ही, प्रदेश पदाधिकारी का ऐलान कर दिया था, उसमें भी कुछ पद उन्होंने खाली रखे थे और प्रकोष्ठों के संयोजक अभी तक नहीं बनाए गए हैं, जिसके लिए इंतजार चल रहा है, प्रदेश पदाधिकारी में अभी एक महामंत्री, एक उपाध्यक्ष और एक मंत्री की जगह खाली बनी हुई है, जबकि कार्य समिति में विशेष आमंत्रित और स्थाई आमंत्रित सदस्यों की नियुक्तियां भी होना है, इसके अलावा विभिन्न मोर्चा और प्रकोष्ठों में नियुक्तियां होना है, खासकर अल्पसंख्यक मोर्चा और विभिन्न प्रकोष्ठों में वैसे पार्टी महिला मोर्चा एवं मोर्चा जैसे महत्वपूर्ण मोर्चे पर नियुक्ति कर चुकी है, कोई दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस में जिलों में कार्यकारिणी को छोटी करने के प्रयास शुरू हो रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाई जिला अध्यक्षों को, इस बारे में पत्र जारी किया है, जिसमें जिले की कार्यकारिणी के स्वरूप के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि बड़े जिलों में 55 और छोटे जिलों में 35 सदस्य बनाए जाए, इससे ज्यादा संख्या नहीं होना चाहिए, जबकि अधिकांश जिलों में जंबोजेट कार्यकारिणी बनाई जा रही है, राजधानी भोपाल में ही शहर कार्यकारिणी के लिए 100 से ज्यादा और ग्रामीण कार्यकारिणी के लिए 85 से ज्यादा लोगों की सूची तैयार है, यही नहीं इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में भी भारी भरकम कार्यकारिणी की तैयारी है, छोटे से जिले छिंदवाड़ा में, जो कार्यकारिणी घोषित की गई है, उसमें 240 सदस्य बना दिए गए हैं, सागर में भी शहर कार्यकारिणी घोषित हो गई है।
प्रदेश में कांग्रेस नव सृजन अभियान को लेकर गंभीर है, मध्यप्रदेश में विशेष तौर पर 2027 में होने वाले नगरी निकाय के चुनाव और 2028 की विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस संगठनात्मक रूप से जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटी है, जिससे कि माहौल को चुनाव परिणाम में बदला जा सके।

कुल मिलाकर प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने संगठन को दुरुस्त करने में जुटे हैं, लेकिन जिस तरह से दावेदार आगे आ रहे हैं, उसे राजनीतिक दलों को खांसी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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