प्रदेश में भाजपा की सरकार बने 2 साल हो गए, लेकिन निगम मंडलों में नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार की उम्मीद लगाए नेताओं का इंतजार खत्म नहीं हुआ, अब एक बार फिर बसंत पंचमी के बाद नियुक्तियां होने की उम्मीद बढ़ गई है।
दरअसल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव दावोस की यात्रा से लौटने के बाद लगभग फाइनल हो चुकी सूची पर आखिरी दौर की चर्चा करेंगे और पहली सूची जारी कर देंगे, बेसब्र हो रहे नेताओं को बसंत पंचमी के बाद नियुक्तियां की सौगात मिल सकती है हालांकि इस तरह की तारीखें पहले भी कई बार तय हुई है, लेकिन किसी न किसी कारण से सूची बाहर नहीं आ पा रही है, कभी नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के इंतजार में सूची जारी नहीं हुई तो कभी राष्ट्रीय नेतृत्व से सहमति न होने के कारण सूची रोकी गई।

मकर संक्रांति के समय सूची जारी होने वाली थी, तभी ऐलान हुआ कि 19 और 20 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव है, इस कारण सूची जारी नहीं हो सकी। यहां तक कि मुख्यमंत्री का 18 जनवरी का दावोस का दौरा 20 जनवरी को शुरू हुआ, मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव 23 जनवरी को लौट रहे हैं, इसी दिन बसंत पंचमी है इसी दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से अंतिम दौर की चर्चा करके सूची जारी हो सकती है।


पहले किस्तों में सूची जारी होना थी, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व खासकर प्रदेश प्रभारी के हस्तक्षेप के चलते अब यह सूची एक ही बार में जारी की जाएगी और लगभग 30 से ज्यादा नाम सूची में हो सकते हैं, वैसे तो इस समय प्रदेश में 46 नगर निगम मंडल है, इसके अलावा प्रमुख शहरों में बने प्राधिकरण में भी नियुक्ति होना है, हो सकता है कि सूची में 40 नाम भी शामिल किए जाएं, इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार की बारी है जो कि 26 जनवरी के बाद कभी भी किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जिस तरह से विजय शाह मामले में आए हैं, उसके बाद यह भी कहा जा रहा है कि विजय शाह सहित कुछ और मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है और लगभग आधा दर्जन से भी ज्यादा नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।

कुल मिलाकर निगम मंडलों में नियुक्तियां और मंत्रिमंडल विस्तार की उम्मीद में बेसब्र हो रहे नेताओं के लिए बसंत पंचमी बहार लेकर आ सकती है, पार्टी ने रणनीतिकारों में कई दौर की बैठकें की है जिसमें जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को नियुक्तियों के माध्यम से साधा जाएगा, क्योंकि प्रदेश में जिस तरह से कांग्रेस सक्रिय हो गई है और जगह-जगह जातीय समीकरण उभारे जा रहे हैं, कथा वाचकों को निशाने पर लिया जा रहा है, उससे भाजपा का, जो ताना-बाना है, वह डिस्टर्ब होने लगा है, ऐसे में जनाधार वाले स्वच्छ छवि के नेताओं को पार्टी, फिर से आगे लाकर 2028 के लिए समीकरणों को साधेगी।
जाहिर है पार्टी किसी भी प्रकार के रिस्क लेने के मूड में नहीं है, पार्टी की थोड़ी सी चूक भारी पड़ जाती है, 2018 विधानसभा के आम चुनाव में पार्टी, जिस तरह से ओवर कॉन्फिडेंस में थी, उसे सत्ता से 15 वर्षों के बाद बाहर होना पड़ा था, विजयपुर विधानसभा के आम चुनाव में मंत्री के रूप में रामनिवास रावत की हार को पार्टी ने गंभीरता से लिया है, विजयपुर विधानसभा का मामला हाई कोर्ट में लंबित है, बुधवार को बुंदेलखंड की भाजपा की गढ़ कहीं जाने वाली देवरी विधानसभा सीट की नगर पालिका के भरी कुर्सी खाली कुर्सी के मतदान में भाजपा विधायक बृजबिहारी पटेरिया और पार्टी खाली कुर्सी को चुनाव जीतने के लिए प्रयास करती रही, जबकि कांग्रेस में अघोषित रूप से भरी कुर्सी को जिताने में मदद कर दी और भरी कुर्सी चुनाव जीत गई, चुनाव जीती नेहा अलकेश जैन को भाजपा ने निष्कासित किया था, इसके पहले इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पार्टी लाई थी, यही कारण है कि पार्टी खाली कुर्सी के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ी रही, लेकिन अंत में खाली कुर्सी चुनाव हार गई, जिसकी धमक राजधानी भोपाल तक रहे, पार्टी पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक, इसलिए लगातार चुनाव जीत रही है कि वह छोटे-छोटे चुनाव परिणामों को गंभीरता से लेती है और उसी के हिसाब से आगे के समीकरण सेट करती है, इसी के चलते बसंत पंचमी के बाद एक बार फिर सूची पर मंथन होगा और फिर पहले निगम मंडलों की सूची जारी होगी और 26 जनवरी के बाद कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।

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